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यूपी में एसआईआर को एक माह की राहत, अब 6 मार्च तक दर्ज होंगी दावे-आपत्तियां

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उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को एक माह का अतिरिक्त समय मिल गया है, जिससे लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 6 मार्च तक बढ़ा दी है, जो पहले 6 फरवरी निर्धारित थी। इसके साथ ही मतदाता सूची में तार्किक विसंगतियों को दूर करने के लिए की जा रही मैपिंग प्रक्रिया से जुड़े नोटिसों का निस्तारण अब 27 फरवरी के बजाय 27 मार्च तक किया जाएगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 10 अप्रैल को होगा। लोकभवन में आयोजित प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि फार्म-6 के आवेदनों में लगातार तेजी आ रही है, जिससे साफ है कि बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक सामने आ रहे हैं जिनके नाम अब तक मतदाता सूची में दर्ज नहीं थे। 6 जनवरी से 6 फरवरी के बीच ही 16 लाख से अधिक फार्म-6 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि अब तक कुल 37 लाख 80 हजार 414 आवेदन आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि मैपिंग के दौरान लगभग 1 करोड़ 4 लाख ऐसे मतदाता सामने आए, जिनमें पिता के नाम, उम्र या पारिवारिक संबंधों को लेकर तार्किक विसंगतियां पाई गईं, जिस कारण उन्हें फिलहाल सूची में शामिल नहीं किया गया। इन मामलों में कुल 3 करोड़ 26 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने हैं, जिनमें से अब तक 2 करोड़ 37 लाख नोटिस जनरेट हो चुके हैं, 86 लाख नोटिस वितरित किए जा चुके हैं और 30.30 लाख मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों की मांग और नोटिसों व आवेदनों की भारी संख्या को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय चुनाव आयोग से समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि विदेश में रह रहे भारतीय नागरिक फार्म-6A के माध्यम से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। फार्म-7 को लेकर समाजवादी पार्टी द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए नवदीप रिणवा ने कहा कि किसी भी मतदाता का नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के तहत होती है। फार्म-7 भरने वाले को अपना वोटर कार्ड देना होता है, आपत्ति का स्पष्ट कारण बताना होता है और बल्क में ऐसे फार्म स्वीकार नहीं किए जाते। प्रदेश में कार्यरत 5.80 लाख बीएलओ एक दिन में अधिकतम दस फार्म-7 ही स्वीकार कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें अंडरटेकिंग भी देनी होती है। फार्म-7 के आधार पर न तो मनमाने ढंग से नाम काटे जाते हैं और न ही बिना नोटिस कार्रवाई होती है। अब तक पूरे प्रदेश से केवल 82,684 फार्म-7 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जिसे भी प्रक्रिया में गड़बड़ी लगती है, वह कानूनी कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है। चुनाव आयोग का लक्ष्य स्पष्ट है कि अंतिम मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित हो, ताकि लोकतंत्र की नींव और मजबूत की जा सके।

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